Mon. Jul 4th, 2022

मैं संगीता आपको अपनी कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सुना रही हूँ. मेरे और पापा का नयाजय सम्बन्ध तब बन गया था जब मैं पति के मरने के बाद दुबारा मायके आ गयी थी. १ रात पापा आये और बोले ‘बेटी! तुम्हारा पति तो गुजर ही चूका है. पर तुम्हारी चूत तो अभी बिलकुल नयी है. इसका इस्तेमाल तो करती रहो. उधर मेरा भी लंड खाने का दिल कर रहा था. बस दोस्तों, हम बाप बेटी में समझौता हो गया था. पापा मेरे कमरे में आ गए. मेरे होंठ पीने लगे. अब मैं मंगल सूत्र नही पहनती थी, क्यूंकि अब मैं एक विधवा हो गयी थी. मेरे होंठ पीते पीते पापा के हाथ मेरे बूब्स पर चले गये. वो जोर जोर से अपने हाथों से मेरी कसी कसी गोल गोल छातियाँ दबाने लगे. मुझे बहुत जोर का नशा चढ़ने लगा. पापा मेरे होठ अपनी किसी माल की तरह पीते जा रहे थे. कुछ देर बाद तो मैं बिलकुल कंट्रोल नही कर पा रही थी.

चोद दो पापा!! अब मुझे मत तड़पाओ! चोद डालो अपनी विधवा लेकिन कमसिन लडकी को!’ मैंने कहा.

मैंने सफ़ेद रंग की साडी पहन रखी थी. पापा मुझे बिस्तर पर ले गयी. मेरे कपडे निकाल दिए. मेरा ब्लाउस खोल दिया, मेरी साड़ी निकाल दी, मेरा पेटीकोट का नारा खोल दिया. यहाँ तक की मेरी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी. मेरे सगे पापा ने मुझे नंगा कर दिया.

बेटी तू तो अपनी माँ की तरह खुबसूरत है!! पापा बोले.

दोस्तों, आपको बता दूँ की मेरी माँ को मरे १० साल हो चुके है. इतने दिनों से पापा को कोई चूत मारने को नही मिली. पर जब मैं विधवा हो गयी तो अब पापा को एक नई नई चूत मिलने वाली थी. पापा मेरे उपर लेट गये. मेरी नर्म नर्म गर्म गर्म चुचियाँ पीने लगा. ‘बेटी!! तू तो बहुत गजब का माल है. तेरा पति को तुझको रोज चोदता होगा??’ वो बोले.

‘हाँ पापा! वो मुझे रोज रात में लेता था. किसी दिन भी नागा नही मारता था. मुझे चोदे बिना उसे नींद नही आती थी’ मैंने कहा

‘बेटी!! तू है ही इतना कडक माल. तुजे जो मर्द एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाए. वो तुझको चोद के ही माने’ पापा बोले और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा. मेरे पापा बड़े शरारती निकले. वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहे थे और पी रहे थे. मुझे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था. ‘पापा आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से पापा’ मैंने कहा. पर उनके उपर कोई असर नही पड़ा. वो अपनी धुन में थे. जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चुचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे थे. पापा बहुत जादा चुदासे हो गए थे. उनका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेटे. मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा देते थे और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पीते थे. दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा.

फिर पापा मेरी चूत पर आ गए. मेरी बुर पीने लगा. मेरी झांटें बहुत बड़ी बड़ी थी. पति के मरने के बाद से किसी मर्द ने मुझे नही चोदा था, इसलिए झांटें बनाने का काम ही नही पड़ा था. पर आज पापा मुझे चोदने वाले थे. मैं चाहती थी की वो पुरे मजे लेकर मुझे चोदे. ‘पापा ! अगर चाहो तो मेरी झांटें बनाकर मुझको पेलो खायो!’ मैंने कहा.

बेटी!! अब इतना वक़्त खाना है की तेरी झांटे बनाऊं. पहले एक बार तुझको चोद खा लूँ, फिर बाद में झांटे बनाता रहूँगा!’ पापा बोले और मेरी बुर पीने लगे. आज मेरी काफी झांटे थी. काली काली झांटों की घास में पापा का चेहरा छिप गया था. मेरी चूत को वो उँगलियों से खोलकर अच्छे से पी रहे थे. अभी मैं बहुत कम ही चुदी हुई थी. क्यूंकि मेरी गुलाबी चूत पर मेहनत करने वाला उपर वाले को प्यारा हो गया था. इसलिए अब मेरे पापा ही मेरी चूत पर मेहनत कर रहे थे. पापा अपनी जुबान को निकाल कर मेरी चूत के लाल लाल ओंठ पी रहे थे. चूत के दाने को ऊँगली से सहला रहे थे. और जीभ चूत के छेद में डाल रहे थे. मुझे बहुत मजा आ रहा था. अब पापा ही मेरे प्रियतम हो गये थे. मैं उनको अपनी चूत पिला रही थी. पुरे बहन में चुदास हो रही थी. यौन उतेज्जना को मैं अनुभव कर रही थी. चुदास ने हल्की भूख भी लगने लगी थी. मुहे पेशाब भी लग रही थी.

मेरे मुतने के छेद से मूत की २ ४ बुँदे निकल आई थी जो पापा पी गये थे. वो किसी देसी कुत्ते की तरह मेरी चूत चाट रहे थे. आज के लिए मैं उनकी कुतिया बन गयी थी. मेरी चूत में बड़ी जोर की सनसनी हो रही थी. कामसूत्र में आचार्य वात्‍स्‍यायन ने ‘काम’ को एक कला कहा है. स्‍त्री पुरुष इस कला को जितना अपने दांपत्‍य जीवन में उतारते हैं, उनका दांपत्‍य जीवन उतना ही मधुर होता चला जाता है. दोस्तों ठीक इसी पैटर्न पर पापा मुझे अपनी बीबी की तरह चोदने के मूड में दिख रहे थे. उन्होंने अपनी कई ऊँगली मेरे चूत में डाल और मेरी चूत फेटने लगी. इससे तो मुझे बहुत जादा चुदास लग गयी. कामवासना मेरे खून में दौड़ने लगी, चुदवाने की तीव्र इक्षा प्रबल हो गयी. पापा बड़ी जोर जोर से चूत फेटने लगे. फिर उन्होंने अपना बड़ा सा लौड़ा मेरे गुलाबी भोसड़े में डाल दिया.

मुझे कूट कूटकर वो चोदने लगे. जैसा मेरी चूत पर कपड़े धो रहे हो. पापा के झटके मुझे बड़े मीठे लग रहे थे. पापा मेरे स्वर्गवासी पति से भी तेज तेज मुझे ले रहे थे. खा पी रहे थे. पापा मुझे खट खट करके चोदने लगे, मुझे लगा की मैं परमात्मा तक पहुच रही हूँ. पापा में सच में बहुत ताकत और उर्जा थी. इतनी जोर जोर से तो मेरा स्वर्गवासी पति मुझे नही चोद खा पाता था. मुझे पेलते पेलते पापा मेरे नारियल को भी जोर जोर से मसल रहे थे और दबा रहे थे. ये सब बहुत शानदार और कमाल का था दोस्तों. मैं अपने सगे बाप से चुदवा रही थी और इश्वर के करीब पहुच रही थी. वो मुझे अपनी औरत समज के चोद रहे थे. दोस्तों, मैं उच्च स्तर का मानसिक और शरीरिक सुख महसूस कर रही थी. मेरी चूत में खलबली मची हुई थी. मेरी चूत से मीठी आनंदमई तरंगे निकल रही थी जो मेरी जाँघों और नाभि दोनों तरफ जा रही थी.

मेरे पापा बहुत कलाकर आदमी साबित हो चुके थे. वो कामशास्त्र के सम्पूर्ण ज्ञाता साबित हो चुके थे. किसी लौडिया को किस तरह से अच्छे से चोदा जाता है, ये पापा अच्छे से जानते थे. उनका लौड़ा मजे से मेरी चिकनी चूत में फिसल रहा था और अंदर बाहर हो रहा था. मैं मजे से चुदवा रही थी और आ आहा माँ माँ माँ आ हा हा हा !! की सिसकारी ले रही थी. मुझको लग रहा था की पापा का लौड़ा अपना माल मेरी चूत में चोदने वाला है. फिर कुछ देर बाद पापा ने मुझे चोदते चोदते सीने से लगा लिया. मुझे अपनी बाहों में भर लिया जैसे कोई आदमी अपनी औरत को भर लेता है. फिर पापा ताबड़तोड़ धक्के मारने लगे. फिर उन्होंने अपना गर्म गर्म माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया. हम दोनों साथ में ही सो गये. जब हम बाप बेटी उठे तो दोपहर के २ बज चुके थे. पापा को भूख लग आई थी.

‘जा बेटी खाना बना. पर इस तरह नंगे नंगे ही बना. तभी मजा आयेगा. आज सारा दिन हम नंगे ही रहेंगे!’ पापा बोली

‘जी पापा जी’ मैंने कहा. दोस्तों, मैं अपने बदन पर एक भी कपड़ा नही पहना. मेरे बाल भी खुले थे थे. आज एक बार मैं पापा से चुदवा चुकी थी. अब पापा के लिए खाना बनाने जा रही थी. मेरी छातियाँ बिलकुल नंगी थी. दुपट्टा तक मैंने नही डाला था. क्यूंकि पापा का आदेश था की आज हम बाप बेटी नग्न अवस्था में ही रहे. मैं बाथरूम में मुतने गयी. खड़े खड़े ही बिना दरवाजा बंद करके मैं मुतने लगी. फिर रसोई में नग्न अवस्था में ही खाना बनाने चली गयी.कुछ देर बाद मैं डाइनिंग टेबल पर खाना लगा दिया. पापा भी आ गये. अब उनका लौड़ा किसी गधे के लौड़े की तरह बहुत ही बड़ा दिख रहा था. उनका लौड़ा एक बार फिर से अपनी बेटी की चूत मारना चाहता था. पापा का लौड़ा दोबारा खड़ा हो गया था. मैं पप्पा के बगल ही बैठ के खाना खाने लगी. पापा का एक हाथ मेरी चूत में था तो दुसरे हाथ से वो दाल चावल खा रहे थे. मेरी चूत का रस उनके हाथ में लग जाता था  तो वो पी जाते थे.

कुछ देर बाद हम बाप बेटी खाना खा चुके थे. ‘बेटी ! तुमको एक बार और चोदने का मन है! पापा बोले

‘चोद लो पापा! अब कौन सा मेरा मर्द बैठा है यहाँ. अब मेरी चूत आपकी ही है. क्यूंकि अब मैं आप पर आश्रित हूँ’ मैंने कहा. पापा ने इस बार मुझे खड़े खड़े ही चोदने का फैसला लिया. उन्होंने मुझे डाईनिंग टेबल पर बिठा दिया और मेरे होंठ पीने लगा. वो इस बार मेरे उपर के ओंठ पी रहे थे. क्यूंकि ऐसा कहा जाता है की उपर के ओंठ पीने से बड़ी जोर की चुदास चढ़ती है. मैंने अपना हाथ पापा के सुडोल चिकने कंधे पर रख दिया. पापा मेरे उपर के ओंठ पीने लगा. मेरे गुलाबी ओंठों का रंग लूटने लगे. आज मैं अपने पापा की औरत बन गयी थी. कोई और चोदने वाला तो था नही मेरी जिन्दगी में. इसलिए मैं अब अपने बाप की औरत बन गयी थी. पापा के हाथ मेरी लटकती छातियों पर थे. जिस तरह से किसी मंदिर की घंटियाँ लटकती रहती है ठीक उसी तरह मेरी नुकीली छातियाँ भी मेरे सीने से लटक रही थी. पापा के हाथ मेरी चुकणी नुकीली छातियों पर था. आज पापा भी जन्नत का मजा ले रहे थे.

दोस्तों, मेरे ओंठ पीने के बाद पापा ने मुझे घुमाकर डाइनिंग टेबल के सहारे खड़ा कर दिया. पापा जस्ट मेरे पीछे खड़े थे. मेरी चिकनी पीठ को वो बड़ी देर तक सहलाते रहे. चुमते रहे. फिर दांत गड़ाने लगे. इससे दोस्तों, मुझे बहुत जादा चुदास लग गयी. किसी भी औरत की पीठ पर कोई मर्द काटता है तो जाहिर सी बात है वो और जादा चुदवाना चाहेगी. पापा के जोर जोर से मेरी पीठ में काटने से मेरी गोरी चमड़ी में उनके दांत के निशान पड़ गये. दर्द भी हो रहा था, पर चुदास भी चढ़ रही थी. फिर पापा निचे जमीन पर बैठ गये. मेरे गोल मटोल गोरे चुतड पापा के सामने थे. पहले तो उन्होने मेरे पुट्ठों को हाथ से छू छूकर सहलाया फिर वही पुराणी हरकत दोहराने लगे. अपने तेज धारदार दांतों से मेरे चुतड काटने लगे. एक ओर जहाँ दर्द हो रहा था, मैं उतेज्जना और यौन सनसनी मैं महसूस कर रही थी.

फिर पापा पीछे से बैठकर मेरा भोसडा पीने लगे. मेरी चूत की लाल लाल फाकों पर पापा के ओंठ थे. वो पी रह थे. मुझे मजा आ रहा था. मैं डाइनिंग टेबल के सहारे खड़ी थी और पापा को बुर की फ़ाकें पिला रही थी. फिर पापा ने मेरी मस्त लाल लाल बुर की फाकों में अपना मोटा लौड़ा डाल दिया और मुझे चोदने लगे. अब पापा मुझे खड़े खड़े की चोद रहे थे. जबकि सुबह पापा ने मुझे लिटाकर चोदा था. मैं अपने सगे बाप के साथ रति क्रीडा कर रही थी. मेरे चूत के गुप्त छेद में पापा लौड़ा दे रहे थे. इस तरह से खड़े होकर चोदने में मुझे जादा गहराई तक लौड़ा खाने को मिल रहा था. गच गच की बड़ी ही मादक आवाज मेरी चूत से पैदा हो गयी थी. पापा ने मुझे डाइनिंग टेबल पर हल्का से आगे की ओर झुका रखा था. वो मुझे गचागच चोद रहे थे. मैंने अपनी चूत की सिकोड़ लिया था जिससे जादा और जादा रगड़ चूत में मिले. और जादा आनंद प्राप्त हो.

आज मैं उच्च स्तर का शारीरिक और मानसिक सुख मह्सुस कर रही थी. आज के लिए मैं अपने सगे बाप की औरत बन चुकी थी. आज के लिए मैं पापा की प्यारी रंडी बन गयी थी. पापा ने मेरी कमर में हाथ डाल दिया था. मेरी नाभि में वो ऊँगली कर रहे थे और पीछे से फटाफट चोद रहे थे. मेरे चूचो पर भी पापा के हाथ थिरक रहे थे. वो बहुत जोर जोर से मेरी चूत पर हमला कर रहे थे और बुर फाड़ रहे थे. पट पट की आवाज पुरे कमरे में गूंज रही थी. आज मैं पापा की प्यारी रंडी बन गयी थी. पापा मेरे सिल्की मनमोहक घुंघराले बालों में अपनी नाक डाल रहे थे और मेरे गजब के चुदासे जिस्म की खुसबु सूंघ रहे थे. और पीछे से मुझे फट फट करके चोद रहे थे. फिर कुछ देर बाद पापा फिर से मेरी खौलती चूत में ही झड गए. एक बार फिर से वो कामवासना के कारण मेरे नंगी चिकनी पीठ पर दांत गढ़ाके काटने लगे. मैं पापा को कुछ नही कहा. अपनी पीठ को कटवाती रही.

जिस आदमी ने मुझे चोद चोदकर इतना जादा सुख प्रदान किया आखिर मैं कैसे उसे मना कर सकती थी. १ हफ्ते बाद हम बाप बेटी फिर से चुदाई में रत हो गये थे. समाज में दिखावे के लिए मैं सफ़ेद साडी ही पहनती थी. पर कोई नही जानता था की अपने पापा के साथ मैं एक शादी शुदा औरत के मजे मार रही हूँ. अब बहुत चीजे बदल चुकी थी. रात १० बजे मैं स्नान करती थी. रंगीन साड़ी पहनती थी. पापा के नाम का सिंदूर लगाती थी. मांग भरती ती. पुरी तरह से सजती थी. बालों में गजरा लगाती थी. नाक में नाथ पहनती थी. ओंठों में लिपस्टिक लगाती थी. फिर पापा के कमरे में चुदवाने जाती थी. इस बात में दोस्तों कोई शक नही है की मैं पापा की प्यारी रंडी बन चुकी थी. आज पापा ने एक बार फिर से मुझे नंगा कर दिया और मुझे अपने सीने पर लिटा लिया. मेरी चूत में लौड़ा दे दिया और मुझे सीने पर लिटाकर चोदने लगे.

मेरे चिकने गोरे जिस्म पर पापा ने एकाधिकार कर लिया था. मेरी पीठ और पुट्ठों को सहला सहलाकर वो चोदने लगे. मेरे दूध को पी रहे थे पापा. दोस्तों, मेरे पति के मरने से अगर किसी को सबसे जादा फायदा हुआ था तो वो पापा ही थे. अब वो रोज मेरी चूत मारते थे. इस समय मैं उनके विशाल सीने पर लेती थी और चुदवा रही थी. मेरी गोल गोल मखमली छातियाँ पापा के सीने ने कुचल रही थी. और निचे मेरी चूत भी पापा के लौड़े से कुचल रही थी. आज पापा ने फिर से पुरे दिन मुझे देसी रंडी बनाकर चोदा और झड गये. आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉटकॉम पर पढ़ रहे है.

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