Mon. Jul 4th, 2022
dost ki bahan sex

हमारे गाँव में जबरदस्त सुखा पड़ा हुआ था। हमारे गाँव के लोग जल्दी बारिश हो जाए इसके लिए हवन करने लगे। ५ जुलाई निकल गया, पर बारिश नही हुई। उसके बाद १० जुलाई भी निकल गया, पर बारिश नही हुई। और दोस्तों इतनी सड़ी गर्मी पड़ने लगी की मैं उपरवाले से मन ही मन में कहने लगा की या तो मुझे धरती से उठा ले, या बारिश करवा दे।

दोस्तों, मुझे वो दिन आज भी याद है १५ जुलाई तक अरब सागर का मानसून हमारे उत्तर प्रदेश के बलिया में पहुच गया और झमाझम बारिश शुरू होने लगी। सिर्फ २ दिन में इतनी झमाझम बारिश हो गयी की हमारे गाँव के सभी छोटे मोटे गड्ढे और नदी नाले और तालाब भर गये। मेरे दोस्त गिरीश, शास्त्री, और शास्त्री की बहन हंसिका मेरे घर पर आ गये और पानी में चलकर मछली मारने की जिद करने लगी। हम सभी १८ साल के उपर और पहले भी हम सभी शास्त्री की बहन को चोद चुके थे। क्यूंकि शास्त्री बहनचोद था और रोज अपनी जवान मस्त मस्त बहन हंसिका की चूत लेता था। इतने दिनों बाद हम आज दोस्तों को बारिश में नहाने का मौका हाथ लगा था। इसलिए हम सभी तुरंत तैयार हो गये।

दोस्तों, आप लोग तो जानते ही होंगे की गाँव में जादातर लड़के कच्छा, बनियान और एक हल्की लुंगी बांधकर कहीं भी निकल जाते तो हम सभी दोस्तों मैं, गिरीश, और शास्त्री कच्छा बनियान और कमर पर एक लुंगी लेकर और मछली पकड़ने के लिए बाल्टी और फावड़ा लेकर मछली पकड़ने निकल गए। हमारे साथ में शास्त्री की मस्त बहन हंसिका थी जो एक मैला सलवार सूट पहन कर हमारे साथ निकल पड़ी।

हंसिका काफी लम्बी चौड़ी ५ फुट ८ इंच की थी और उसका बदन काफी भरा हुआ था। वो बहुत गर्म लड़की थी और अपने सगे भाई शास्त्री से खूब चुदवाती थी। इसलिए अक्सर मैं, गिरीश और शास्त्री हंसिका के इर्द गिर्द ही घूमा करते थे। हम ४ लोग की टोली पुरे गाँव में बड़ी मशहूर थी। उस दिन भी बारिश हो रही थी। अप्रैल, मई, जून की भींसड़ गर्मी झेलने के बाद आज हम दोस्तों को नहाने का मौका मिला था।

हमारे गाँव में एक बड़ा तालाब था, जो पूरी तरफ से पानी में भर गया था। उसके बगल एक छोटा तालाब था वो भी पानी से पूरी तरह से भर गया था। हम चारो उसी तालाब में कूद गये और पानी में लेटकर नहाने लगे। हम जवान हो चुके थे, पर अब भी हम चारो में काफी बचपना भरा हुआ था। दोस्तों, बारिश के ठंडे पानी में नहाना किसी वरदान से कम न था। कुछ देर बाद हम तीनो लड़को ने अपनी अपनी लुंगी निकाल दी और सिर्फ बनियान और कच्छा में आ गये और लोट लोटकर हम तालाब में नहाने लगा। ये तालाब कुछ दिन पहले बिलकुल सुख गया था, पर अब २ ३ दिनों में सारा दिन पानी गिरने के कारण दोनों तालाब भर गये थे।

ठंडे पानी में नहाने के कारण हम तीनो लड़को के लंड अपने आप खड़े हो गये। मैंने शास्त्री की बहन हंसिका की बहन को पकड़ लिया और यहाँ वहां उसे छूने लगा। फिर गिरीश भी मेरे पास आ गया और हंसिका पर हाथ से पानी भर भरके फेकने लगा। शास्त्री ने जब देखा की दोनों लड़के उसकी बहन को हाथ लगा रहे है तो वो भी आ गया। हम तीनो हंसिका के उपर पानी डालने लगे और उसे छेड़ने लगे।

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हंसिका बड़ी गर्म और बेहद चुदासी लड़की थी। मैं कमर पानी के अंदर थी। हंसिका को भी शरारत सूझी और उसने पानी के निचे मेरे कच्छे में हाथ डाल दिया और मेरा लंड पकड़ लिया और फेटने लगी। गिरीश हंसिका के दूध को छूने लगा। और शास्त्री खुद अपनी पहन की गोरी पीठ पर हाथ लगाने लगा। बड़ा देर तक ये सब कार्यक्रम चलता था। फिर गिर ने हंसिका के हाथ को पकड़कर अपने कच्छे में डाल दिया

“ऐ हंसिका!!! देख आज कितने दिनों बाद गाँव में बारिश हुई है…इसलिए तेरी चूत तो बनती है!!” गिरीश बोला

“हाँ हंसिका!! आज हम तुझे बिना चोदे नही मानेंगे!!…आज तो पार्टी होनी चाहिए!” मैंने भी कहा और हाथ से तालाब के पानी को भरके उसपर डालने लगा।

“हाँ !! बहना..बारिश होने की खुशी में तो आज हम सबको अपनी रसीली चूत के दर्शन करवा दे!!” बहनचोद शास्त्री अपनी बहना हंसिका से बोला

“ठीक है !!…गाँव में बरसात होने की खुशी में आज तुम सबको मैं अपनी रसीली चूत दूंगी….पर कोई मुझे ढंग से चोद ना पाया तो तुम सबको माँ बहन की गालियां मिलेंगी!!” हंसिका बोली। दोस्तों हम दोस्तों गवैयाँ [गावं की भाषा] में जादातर बात करते थे, पर आप लोग गावं की भाषा समज नही पाएंगे ,इसलिए मैं आप लोगो को सारी घटना शुद्ध हिंदी में सुना रहा हूँ। उसके बाद मैंने पानी के भीतर ही हंसिका की सलवार खोल दी और उसकी चड्ढी के भीतर उसकी चूत में हाथ डाल दिया और ठन्डे ठन्डे पानी में उसकी चूत को सहलाने लगा।

आप लोग अंदाजा लगा सकते है की हमको कितना मजा मिल रहा होगा। सुबह के ११ बजे थे। चारो तरफ जुलाई महीने वाले काले काले बादल छाए हुए थे, सारे उम्रदराज लोग अपने अपने घर में दुबके थे की कहीं बीमार ना पड़ जाए। सिर्फ बच्चे और हम जैसे जवान ही बाहर बारिश में नहा रहे थे और तालाब में लोट लोटकर नहा रहे थे। हम बड़े तालाब के बगल छोटे ताल में तैर रहे थे जिसमे डूबने का कोई खतरा नही था। बारिश का पानी काफी साफ़ था। बड़ी देर तक मैं हंसिका की चूत में ऊँगली पानी के भीतर ही करता था। वो आराम से पानी में बैठ गयी थी।

“अरे बहनचोद दीवान!!….अपना ही ऊँगली करेगा या मुझे भी करने देगा!!” गिरीश मेरा लंगोटिया यार बोला

“आओ गांडू….तुम भी हंसिका की चूत में ऊँगली कर लो!!” मैंने मजाक करते हुए कहा। उसके बाद गिरीश से शास्त्री के सामने ही उसकी बहन की चूत में हाथ डाल दिया और पूरी पूरी ऊँगली हंसिका की कई बार चुदी चूत में जोर जोर से करने लगा। ठन्डे पानी में इस तरह से जलक्रीडा के साथ रतिक्रीड़ा करना किसी जन्नत से कम नही था। हंसिका खूब मजे लेती थी। हम सब पानी में लोट भी रहे थे। शास्त्री इधर उधर नहा रहा था तो मैंने हंसिका के भीगे मम्मो पर हाथ रख दिया और उसके मम्मे दबाने लगा। उफफ्फ्फ्फ़ ….क्या बड़े बड़े ३६” के दूध से हंसिका के। धीरे धीरे हम लड़के लौड़े टन्न होकर खड़े हो गये थे।

“शास्त्री!!….देख तू अपनी बहन को रोज चोदता है भाई…..आज मैं इसकी चूत में लौड़ा दूंगा!!” मैंने कहा

“चोद चोद ले….मैं इसको आखिरी में लूँगा!!” शास्त्री बोला। मैं हंसिका को पानी के किनारे ले गया। वहाँ पर कम पानी था और नीचे सफ़ेद साफ़ बालू बालू थी। “हंसिका!! आजा इधर !! यही तुझको चोदूंगा!!” मैंने कहा। हंसिका आकर तालाब के किनारे आकर लेट गयी। उसकी सलवार तो पहले से खुली थी और पानी में भीगी थी। वो छिनाल लेट गयी। मैंने उसकी सलवार हाथ से पकड़कर खींच दी और निकाल दी। हंसिका ने बैगनी रंग की चड्ढी पहन रखी थी। इतनी देर से मैं और गिरीश उसकी चूत में ऊँगली कर रहे थे पर उसकी चड्ढी का रंग नही देख पाए थे क्यूंकि उसकी चूत पानी के अंदर थी। मैंने हंसिका की चड्ढी निकाल निकाल दी। उसकी चूत बिलकुल साफ़ थी एक भी झांट का बाल नही था। हंसिका हमेशा बाल सफा वाले साबुन को इस्तेमाल करती थी। जहाँ वो लेती थी, वहां तालाब के पानी की लहरे आ रही थी। इसलिए हम सबको बहुत मजा मिल रहा था।

मैंने अपनी बनियान और कच्छा निकाल दिया और पूरी तरह से नंगा हो गया। बरसात हो रही थी। भीगते हुए मैं और भी सेक्सी लग रहा था। मेरा जिस्म बारिश और तालाब के पानी से भीगा हुआ था। मेरा बदन इकहरा था और मैं बहुत सेक्सी लग रहा था। मैंने भी तालाब के उथले पानी में लेट गया और शस्त्री की बहन हंसिका की चूत पीने लगा। ओह्ह वाह….मजा आ गया था दोस्तों। कितनी रसीली कितनी सफ़ेद, गोरी और चिकनी चूत थी। मानसून अपने शबाब पर आ चूका था और चारो तरफ काले काले बादल आसमान में थे। मौसम इतना रोमांटिक था की आपको मैं क्या बताऊँ। ऐसे में शास्त्री की बहन की चूत मिलना किसी पार्टी से कम नही था। मैं तालाब की रेत में लेट गया और हंसिका की चूत मजे लेकर पीने लगा। बड़ी देर तक मैं किसी चुदसे और चूत के प्यासे कुत्ते की तरह हंसिका की बुर अपनी जीभ से चाटता रहा।

कुछ देर में हंसिका की बुर अपना माल छोड़ने लगी। जिसको मैं पूरा का पूरा चाट गया। कुछ देर बाद मैंने अपना ६” लम्बा लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा। खूब मजा आया दोस्तों। क्या आप लोगो ने बारिश में किसी लड़की की चूत मारी है। एक बार करना जन्नत मिल जाएगी। हंसिका तालाब का पानी अपनी हथेली में भर भर के मेरे मुँह पर मारने लगी और हंसी ठिठोली करने लगी। मुझे भी मस्ती सूझी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और उसके मुँह से अपना मुँह जोड़ दिया और उसके गुलाबी ओंठ पीने लगा। जहाँ हमारे गावं की लडकियाँ शर्मीली थी और जल्दी चूत देने को तयार नही होती थी वही हंसिका का रहन सहन कीसी लड़के जैसा था। उसकी दोस्ती हम लड़कों से जादा थी और लड़कियों से कम। हंसिका हम तीनो को खुलकर चूत दिया करती थी।

मैंने तालाब के पानी में हंसिका का हाथ पकड़ लिया जिससे वो मेरे साथ और शरारत ना कर सके। मेरे मुँह पर और पानी ना मार सके और मैं उसके होठ पीने लगा। नीचे से मैं गिरीश और शास्त्री के सामने ही हंसिका की चूत की सिटी खोल रहा था। अपनी कमर से जोर जोर से लंड उसकी बड़ी से चूत में दे रहा था। कुछ देर में हंसिका सरेंडर हो गयी और उसने शरारत करना बंद कर दी।

“चुद गयी….चुद गयी….शास्त्री!!….तेरी बहना तो आज चलती बारिश में लंड खा गयी!!” गिरीश बोला

“गांडू!…तेरी बहन को भी किसी दिन इसी तालाब में लेकर आऊंगा और चलती बारिश में उसकी चूत में लौड़ा डालके जीभरके उसको कूटूँगा!!” शास्त्री थोडा चिढकर बोला। मैं इधर गपागप हंसिका की चूत में लंड देता रहा। फिर वो पानी में ही मुझसे चिपक गयी और मजे से चुदवाने लगी। २५ मिनट बाद मैंने जल्दी से अपना लौड़ा हंसिका के भोसड़े से बाहर निकाल दिया और उसके मुँह पर सारा माल गिरा दिया। मैं उस समय जवान १८ साल का युवा लड़का था। मेरे लंड से १२, १५ बार माल निकला जो सीधा शास्त्री की बहन हंसिका के मुँह पर जाकर गिरा। कुछ माल को चाट गयी। कुछ को उसने तालाब के पानी से साफ़ कर लिया। फिर बारिश के पानी से उसका मुँह तुरंत ही साफ़ हो गया।

“जा गांडू!!…..जाकर मेरी बहन को चोद ले…..पर याद रहे एक दिन अपनी बहन की चूत दिलवाना भोसड़ी के!!” शास्त्री बोला

उसके बाद गिरीश आकर हंसिका के पास तालाब के उथले पानी में लेट गया और हंसिका की चूत पीने लगा। उसने तालाब के ताजे बारिश वाले पानी से उसकी चूत साफ़ कर दी क्यूंकि उसको मैंने अभी कुछ देर पहले चोदा था। अब गिरीश मजे लेकर अपनी जीभ हंसिका के भोसड़े में दे रहा था और गुलाबी मीठी चूत का पान कर रहा था। फिर गिरीश ने अपनी बीच वाली लम्बी ऊँगली हंसिका के भोसड़े में पेल थी और उसकी चूत फेटने लगा। हंसिका आह आह आ आ माँ माँ आई आई….करने लगी। मुझे ये देखकर ही खूब मौज मिली। गिरिश इतनी जोर जोर से हंसिका की बुर फेटने लगा की पानी के भीतर पच पच की पनीली आवाज आने लगी।

“ओए भोसड़ी के बहन के मेरी….कोई रंडी नही है बलिया के तिवारी बजार की!! जो पूरा हाथ उसके भोसड़े में पेले दे रहा है…..आराम से चोद!!” शास्त्री चिल्लाया। अब गिरीश हंसिका की बुर में आराम आराम से ऊँगली करने लगा। कुछ देर गिरीश ने अपना लौड़ा हंसिका के भोसड़े में डाल दिया। हम तीनो दोस्तों का लौड़ा ६ ६ इंच के आसपास था। कोई एक दो मिली सेंटीमीटर कम हो तो अलग बात है। पर हम तीनो लड़को के लंड काफी तगड़े तगड़े थे। मैंने देखा की जैसे जैसे गिरीश हंसिका को लेने लगा हंसिका अपनी गांड और पिछवाड़ा उठाने लगी। गिरीश हंसिका के दूध पी पीकर उसको ठोंक रहा था। मुझे हंसिका को चुदते हुए देखने में बहुत मजा मिल रहा था। हंसिका बार बार अपने ओठ चाबने लग जाती थी।

गिरीश फट फट करके उसकी चूत की हवा निकाल रहा था। हंसिका चुद रही थी और उसकी इस वक़्त बुरी हालत थी।“ आह आह आह ….फाड़ दो!!…फाड़ दो मेरी चूत को….गिरीश….चोद डालो आज मुझे कीसी गाँव की रंडी की तरह!!” हंसिका चिल्लाने लगी तो गिरीश बहुत जोर जोर से पानी में डूबी हंसिका की चूत में लंड देने लगा जिससे पानी छप्प छप्प करके उपर की तरफ उठने लगा। गिरीश जोर जोर से हंसिका की चूत में लंड देने लगा। हंसिका हम तीनो के सामने पूरी तरह से नंगी थी और उसके जूसी स्तन तलाब के ठंडे पानी में भीगे हुए थे। हंसिका के मम्मे के उपर चमकीले काले रंग के काले काले घेरे थे जिसमे वो बला की खूबसूरत माल लग रही थी। मेरे दोस्त गिरीश ने हंसिका के दूध को मुँह में भर लिया और मम्मे पीते पीते उसकी चूत मारने लगा।

मैं और शास्त्री मजे से हंसिका की ठुकाई देख रहे थे। इसी बीच मैंने शरारत करते हुए कुछ पानी हथेली पर लिया और हंसिका के मुँह पर डाल दिया। वो चिढ़ गयी, वो मुझे कुछ नही कर सकी। क्यूंकि वो मजे से चुदवा रही थी। कुछ देर बाद गिरीश ने हंसिका के लाल लाल भोसड़े में ही अपना माल छोड़ दिया। उसके बाद शास्त्री ने अपनी बहना को चोदा। दोस्तों, हमारे गावं में बारिश होने की खुशी में हम लोगो ने शास्त्री की बहना हंसिका को चोदकर उस दिन खूब मजा लिया। ये कहानी आप लोग नॉन वेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

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